जान का डर तो सभी को है साहब, लेकिन मजबूरी में सब करना पड़ रहा है। जान के डर से हम झोपड़ों में ही रह रहे थे, लेकिन जब खाने को अनाज नहीं मिला और बच्चे भूख से बिलखने लगे तो हिम्मत टूट गई। इसके बाद सामान उठाया और पैदल ही अपने घर के लिए निकल पड़े। यह मजबूरी भरी हकीकत एक व्यक्ति या परिवार की नहीं है। बल्कि यह लॉकडाउन के कारण बने हालात के बाद इंदौर-इच्छापुर हाईवे और जंगल-खेतों के रास्ते घरों को लौट रहे हर व्यक्ति की है। अपने गांव और कस्बों से रोजी-रोटी की तलाश में बड़े शहरों में गए दिहाड़ी मजदूर अब घर लौट रहे हैं। इनके गांव-शहर अलग-अलग हैं, लेकिन कहानी एक ही है। रोजगार छीन गया और बच्चों की भूख बर्दाश्त नहीं हुई तो तपती धूप और गर्मी के बीच पैदल ही घर को चल दिए।
केस 1 : ठेकेदार ने कहा- काम शुरू होने पर मिलेगी मजदूरी, 40 मजदूर 70 किमी पैदल चले
जलगांव की पाइप फैक्ट्री में मजदूरी करने वाले 40 लोग 70 किमी पैदल चलकर महाराष्ट्र के खानापुर तक पहुंचे। यहां तेल के ड्रम ले जा रहे ट्रक चालक ने उन्हें बैठा लिया लेकिन बुरहानपुर की सीमा पर सभी को रोक लिया। मजदूर सीताराम और रविंद्र ने बताया सभी मजदूर बुरहानपुर के सीतापुर, खंडवा के टिमरनी और कटनी के रहने वाले हैं। लॉकडाउन के बाद ठेकेदार ने काम चालू होने पर मजदूरी देने को कहा। 14 अप्रैल तक बंद है। इसके बाद भी काम कब शुरू होगा, यह पता नहीं। इसलिए पैदल ही चल पड़े लेकिन पुलिस ने जांच के लिए रोक दिया।
केस 2 : होटल मालिक ने कहा खाना दूंगा, वेतन नहीं
शिर्डी की होटल में काम करने वाले डोईफाेडिया के 11 युवक सोमवार सुबह 10 बजे लोनी बॉर्डर पहुंचे। सभी 300 किमी का पैदल सफर कर यहां पहुंचे थे। शिवा नामदेव ने बताया 6 महीने से शिर्डी के एक होटल में सभी एक साथ काम करते थे। लॉकडाउन के बाद होटल बंद हो गई। मालिक ने कहा मैं खाना दूंगा लेकिन वेतन नहीं। इसलिए सभी ने घर वापसी का मन बनाया। पैदल ही घर के लिए निकल पड़े। चार दिन में यहां पहुंचे हैं।
केस 3 : 2 माह पहले परिवार के साथ गए थे, तीन दिन भूख बर्दाश्त की, चौथे दिन हिम्मत टूट गई
सुनील सेलकर ने बताया कि बुरहानपुर के ग्राम झिरपांजरिया से दो महीने पहले परिवार के 13 सदस्यों के साथ काम करने के लिए महाराष्ट्र के भुसावल गए थे। साथ में चार बच्चे भी हैं। लॉकडाउन के बाद मजदूरी नहीं मिली तो झोपड़े में ही रह रहे थे। घर में अनाज भी खत्म हो गया। बच्चों सहित सभी ने तीन दिन तक भूख बर्दाश्त की लेकिन चौथे दिन हिम्मत टूट गई। इसके बाद सामान उठाया और पैदल ही हाईवे के रास्ते निकल पड़े। दापोरा पहुंचे तो पुलिस ने रोक लिया और बुरहानपुर के जिला अस्पताल भेज दिया।
केस 4 : घर वापसी के लिए 500 किमी का पैदल सफर
महाराष्ट्र के धारणी के रहने वाले 25 से ज्यादा युवक घर लौटने के लिए 500 किमी पैदल चलकर 6 दिन में बुरहानपुर पहुंचे। हरिकलाल पटेल ने बताया हम गुजरात के दमन में काम करते थे। चावल की फैक्ट्री में चावल की सफाई के बाद निकलने वाले कचरे को गाड़ी में भरने और उसे दूसरी जगह पहुंचाने का काम था। 20 मार्च से फैक्ट्री बंद हो गई। आवागमन के साधन भी नहीं हैं, इसलिए पैदल ही जा रहे हैं। सीमा पर हमें रोक दिया। यहां जांच के बाद अपने घर जाएंगे।